छठ पर्व पर दिल्ली में भी सरकारी अवकाश
नई दिल्ली: आस्था का महापर्व छठ हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह चार दिनों तक मनाया जाता है। इस साल छठ पर्व 11 नवंबर को शुरू हुआ और 14 नवंबर को खत्म होगा। खास कर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह त्यौहार प्रमुखता से मनाया जाता है। इस मौके पर बिहार में स्कूल, कॉलेज और सरकारी ऑफिसों में छुट्टियां रहती हैं। इतना ही नहीं बिहार में 13 और 14 नवंबर को बैंक भी बंद रहेंगे।
देश की राजधानी दिल्ली में भी छठ को लेकर खास तैयारियां की दी हैं। इस मौके पर दिल्ली के शिक्षा निदेशालय ने भी स्कूलों में छुट्टी का ऐलान किया है। सरकार के आदेश के बाद मंगलवार को दिल्ली सरकार की सभी स्कूल बंद रहेंगी।
भगवान भास्कर की आराधना का 4 दिवसीय महापर्व छठ नहाय-खाय के साथ रविवार से शुरू हो गया। आस्था के पर्व छठ के प्रथम दिन प्रात: व्रती अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पटना के गंगा घाट सहित प्रदेश के अन्य नदियों के घाटों और तालाबों के किनारे पहुंचे तथा स्नान एवं पूजा अर्चना के साथ नहाय-खाय की रस्म पूरी की। नहाय-खाय के दौरान व्रती अरवा चावल का भात, चने की दाल, कद्दू की सब्जी तथा धनिया के पत्ते की चटनी का भोग लगाते हैं।
सूर्य उपासना के इस पावन पर्व पर नहाय-खाय के अगले दिन व्रतियों द्वारा निर्जला उपवास रखकर खरना किया जाता है। खरना में दूध, अरवा चावल व गुड से बनी खीर एवं रोटी का भोग लगाया जाता है । खरना के बाद व्रतियों का 36 घंटों का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा जो कि आगामी 13 नवंबर की शाम को अस्ताचलगामी सूर्य और 14 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पारण के साथ संपन्न होता है
- विधुभूषण
दिल्ली से 'दिनकर इंडिया' के हिंदी संस्करण के लिए
देश की राजधानी दिल्ली में भी छठ को लेकर खास तैयारियां की दी हैं। इस मौके पर दिल्ली के शिक्षा निदेशालय ने भी स्कूलों में छुट्टी का ऐलान किया है। सरकार के आदेश के बाद मंगलवार को दिल्ली सरकार की सभी स्कूल बंद रहेंगी।
भगवान भास्कर की आराधना का 4 दिवसीय महापर्व छठ नहाय-खाय के साथ रविवार से शुरू हो गया। आस्था के पर्व छठ के प्रथम दिन प्रात: व्रती अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पटना के गंगा घाट सहित प्रदेश के अन्य नदियों के घाटों और तालाबों के किनारे पहुंचे तथा स्नान एवं पूजा अर्चना के साथ नहाय-खाय की रस्म पूरी की। नहाय-खाय के दौरान व्रती अरवा चावल का भात, चने की दाल, कद्दू की सब्जी तथा धनिया के पत्ते की चटनी का भोग लगाते हैं।
सूर्य उपासना के इस पावन पर्व पर नहाय-खाय के अगले दिन व्रतियों द्वारा निर्जला उपवास रखकर खरना किया जाता है। खरना में दूध, अरवा चावल व गुड से बनी खीर एवं रोटी का भोग लगाया जाता है । खरना के बाद व्रतियों का 36 घंटों का निर्जला उपवास शुरू हो जाएगा जो कि आगामी 13 नवंबर की शाम को अस्ताचलगामी सूर्य और 14 नवंबर को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पारण के साथ संपन्न होता है
- विधुभूषण
दिल्ली से 'दिनकर इंडिया' के हिंदी संस्करण के लिए

बहुत अच्छा
ReplyDeleteसुन्दर कहानी
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