2.0
फ़िल्म समीक्षा - 2.0 नई दिल्ली /यह धरती सिर्फ मनुष्यों की निजी संपत्ति नही है। इस पर पशु-पक्षियों समेत सभी प्राणियों का उतना ही हक है।मानव जीवन के लिए चिड़ियों का होना भी आवश्यक है। डायरेक्टर शंकर ने अपनी जबर्दस्त टेक्नॉलजी बेस्ड फिल्म के माध्यम आखिर में यही संदेश देने की कोशिश की है। भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्म 2.0 के निर्माताओं ने इसमें हॉलिवुड लेवल की 3डी तकनीक और वीएफएक्स का इस्तेमाल किया है। यही वजह है कि इस फिल्म का बजट 600 करोड़ पार कर गया है। 2.0 को 2010 में आई 'रोबॉट' की सीक्वल की बजाय स्प्रिचुअल सक्सेसर बताया जा रहा है। यानी कि फिल्म की कहानी पिछली फिल्म से एकदम अलग है, लेकिन इसमें कुछ कैरक्टर पिछली फिल्म के भी हैं। हालांकि फिल्म की कहानी के तार पिछली फिल्म से भी जुड़ते हैं। फिल्म की कहानी कुछ यूं है कि पक्षियों को मोबाइल के रेडिएशन के चलते होने वाली परेशानी से तंग आकर एक पक्षी विज्ञानी पक्षीराजन (अक्षय कुमार) मोबाइल टावर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेता है। उसके कुछ अरसे बाद चेन्नै शहर में अचानक से लोगों के मोबाइल फोन उनके हाथों से छूटकर आसमान की ओर जाने ल...