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बिखर गया पर्सियन साम्राज्य कब जागेंगे हिंदू ?

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  बिखर गया पर्सियन साम्राज्य कब जागेंगे हिंदू ? नई दिल्ली से विधुभूषण ।   भारत के पश्चिम में, मध्यपूर्व एशिया जो इस्लामिक राष्ट्र ईरान है, वहां आज से 1360 वर्ष पूर्व अग्नि पूजक रहते थे जो ज़रथुष्ट्री धर्म के अनुयायी थे और उन्हें ज़ारोऐस्ट्रीअन कहा जाता था। ये ही जब विस्थापित होकर भारत आए तो पारसी कहे जाने लगे। उस काल में ईरान को पर्शिया (फारस) के नाम से जाना जाता था, जो सबसे बड़ा और शक्तिशाली साम्राज्य था। इस शक्तिशाली साम्राज्य का पराभव सन 633 से तब शुरू हुआ जब खलीफा ओमर ने उल्लाइस के युद्ध में परास्त किया था। जब पर्सियन साम्राज्य का पराभव शुरू हुआ तब वहां ससनियाँ राजवंश का शासन था। इस वंश ने सन 224 से 651 तक राज्य किया था इसलिए उसे ससनियाँ सम्राज्य भी कहा जाता है। यह साम्राज्य कितना बड़ा था इसको इस बात से समझा जा सकता है कि अपने श्रेष्ठतम काल मे इस साम्राज्य के अंतर्गत आज का ईरान, इराक, बहरीन, कुवैत, ओमान, क़तर,यूएई, सीरिया, पलेस्टाइन, लेबनान, इजराइल, जॉर्डन, अर्मेनिआ, जॉर्जिया, अज़रबैजान दागिस्तान, मिश्र, टर्की का बड़ा भाग, अफगानिस्तान, तुरकेमिस्तान,उज़्बेकिस्तान, ताजीकिस्तान, यम...
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  Vidhu Bhushan Special Education Teacher  विकलांगता अधिनियम, 2016 के साथ लोगों के अधिकार विकलांगता अधिनियम, 2016 के साथ लोगों के अधिकार और मानसिक शांति के साथ लोगों के अधिकार अधिनियम के इनकार पर, यह देखा गया है कि हालांकि मानसिक बीमारी को विकलांगता की स्थिति के रूप में शामिल किया गया है, मानसिक बीमारी (पीएमआई) वाले व्यक्तियों की विशेष जरूरतों और उनके परिवारों को ठीक से संबोधित नहीं किया गया है। मानसिक बीमारी वाले पीडब्ल्यूडी को अपनी बीमारियों की प्रकृति के कारण विशेष और विभिन्न प्रकार के ध्यान और देखभाल की आवश्यकता होती है। अक्सर, गंभीर मानसिक बीमारी वाले व्यक्ति अंतर्दृष्टि की कमी के कारण अपनी बीमारी के बारे में जागरूक होने की स्थिति में नहीं होते हैं। इन परिस्थितियों में, उनके परिवार उन्हें देखभाल और सहायता प्रदान करने में बड़ी संपत्ति हैं। हमारे देश में, जहां मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में कार्मिक संसाधन बेहद कम हैं, मानसिक बीमारी के प्रबंधन में परिवार एक बहुत ही महत्वपूर्ण संपत्ति है।  परिवार के सदस्यों को मानसिक स्वास्थ्य सेवा और परिवार के समर्थन में सबसे बड़ी हद तक शा...

ललका गुलाब - कहानी

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गोबर उठाते हुए परभुनाथ चचा ने चाची से पूछा है कि आज कौन सा दिन है हो?  घर के काम काज में अंझुराई चाची अंगुरी पर दिन का हिसाब बैठाती हैं।जहिया देवनथवा गुजरात गया था उस दिन सोमार था। तो सोमारे सोमार आठ आ मंगर नौ... तब तक मोबाइल पर सिर झुकाए रजेसवा बोल पड़ता है - आज 'रोज-डे' है। परभुनाथ चचा पूछ बैठते हैं - ई कौनी कलेण्डर से देख के बता रहे हो? राजेसवा बताता है - 'लव वीक' चल रहा है आज सेकेंड डे है, इसे 'रोज डे' कहते हैं। आज गुलाब दिया जाता है...  परभुनाथ चचा माथा पीट लेते हैं। कैसा समय आ गया है! प्रेम के लिए भी दिन और सप्ताह तय होने लगे।देने और लेने से प्यार की गहराई देखी जा रही है। एक वो भी समय था।इधर गुलाब था उधर प्रेम था और बीच में लाठी थी।             चालीस साल पहले छपरा जिले के रिविलगंज कस्बे में सिवनाथ चौधरी के लड़के परभुनाथ चौधरी की दुहलिन आई थी।पवनी पूजिहर का नेग जोग निपटाने के बाद माली जब जाने लगा तो परभुनाथ चौधरी ने कोने में ले जाकर माली से कहा-"ए काका! तनी एगो ललका गुलाब सांझ के बेरा पहुंचा दीजिएगा। सुना है पहली रात को दुलहिन के हाथ...

अमेरिका को पछाड़ भारत बन सकता है सबसे बड़ा हथियार निर्यात देश अगर हट जाए एक कानून

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[05/02 /2019 12:30 PM] Vidhu Bhushan , New Delhi : जिस राष्ट्र में एक पर्व (विजयदशमी) विशेष रूप से शस्त्र पूजन के लिए हो उस राष्ट्र में शस्त्र रखना एवं उसका निर्माण करना क़ानूनी रूप से अवैध है, क्या ये एक मजाक नहीं है ? इससे साफ़ जाहिर होता है इस राष्ट्र में चल रहे नियम कानून एवं संविधान पूर्णतया इस राष्ट्र के आज भी नहीं हैं. आज भी जगह-जगह ब्रिटिश कानूनों की छाप दिख जाती है जिसमें से कुछ बेहद ही आत्मघाती हैं. ब्रिटिशों के जिन काले कानूनों को भारत आज भी ढो रहा है उनमें से एक है ”Indian Arms Act 1878” जो भारत में ब्रिटिश वायसराय Robert Lytton ने लागू किया था. 1857 में भारतीयों के साथ हुए युद्ध में (1857 विद्रोह गलत शब्द है) करारी हार के बाद जब ब्रिटिश पुनः भारत में मजबूत हुए तो उन्होंने सबसे महत्त्वपूर्ण काम भारतीयों को शस्त्रहीन करने का किया. घर-घर में शस्त्र ही भारतीयों की ताकत थे जिसके चलते ब्रिटिशों का 1857 में भारत के एक बड़े हिस्से से सफाया कर दिया गया था लेकिन Indian Arms Act 1878 लागू कर ब्रिटिशों ने भारतीयों को शस्त्र रखने और शस्त्र निर्माण करने से वंचित कर दिया जबकि ब्रिट...

जार्ज फर्नांडिस नही रहे

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पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस नई दिल्ली । जबरदस्‍त ट्रेड यूनियनिस्‍ट, र्निभीक पत्रकार और राजनीतिज्ञ जॉर्ज फर्नांडिस हमारे बीच नहीं रहे। वह 88 साल के थे। बताया जा रहा है कि स्वाइन फ्लू के कारण उनकी जान गई है। हालांकि जॉर्ज फर्नांडिस लंबे वक्त से अलजाइमर से पीड़ित थे। देश में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाले इस राजनेता के जीवन का सफर विशेष रूप तीन राज्‍यों में गुजरा। कर्नाटक जहां मंगलौर में इन्‍होंने जीवन की शुरुआत की, महाराष्‍ट्र जहां मुंबई में एक आग उगलने वाले मजदूर नेता के रूप में उनकी पहचान बनी और बिहार जहां उन्‍होंने सत्‍ता की राजनीति में कामयाबी हासिल की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर दुख जताया है। ऐसा रखा गया 'जॉर्ज' नाम  जॉर्ज फर्नांडिस का व्‍यक्‍तित्‍व बहुआयामी था। वे एक जबरदस्‍त ट्रेड यूनियनिस्‍ट, र्निभीक पत्रकार और राजनीतिज्ञ थे। जॉर्ज फर्नांडिस भारत के पूर्व रक्षामंत्री भी रहे। भारतीय संसद की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार जॉर्ज फर्नांडिस का जन्म मंगलौर में 3 जून 1930 को हुआ। उनकी मां किंग जॉर्ज फिफ्थ की बहुत बड़ी प्रशंक थीं और उनका ...

2.0

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फ़िल्म समीक्षा - 2.0 नई दिल्ली /यह धरती सिर्फ  मनुष्यों की निजी संपत्ति नही है। इस पर पशु-पक्षियों समेत सभी प्राणियों का उतना ही हक है।मानव जीवन के लिए चिड़ियों का होना भी आवश्यक है।  डायरेक्टर शंकर ने अपनी जबर्दस्त टेक्नॉलजी बेस्ड फिल्म के माध्यम आखिर में यही संदेश देने की कोशिश की है। भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्म 2.0 के निर्माताओं ने इसमें हॉलिवुड लेवल की 3डी तकनीक और वीएफएक्स का इस्तेमाल किया है। यही वजह है कि इस फिल्म का बजट 600 करोड़ पार कर गया है। 2.0 को 2010 में आई 'रोबॉट' की सीक्वल की बजाय स्प्रिचुअल सक्सेसर बताया जा रहा है। यानी कि फिल्म की कहानी पिछली फिल्म से एकदम अलग है, लेकिन इसमें कुछ कैरक्टर पिछली फिल्म के भी हैं। हालांकि फिल्म की कहानी के तार पिछली फिल्म से भी जुड़ते हैं। फिल्म की कहानी कुछ यूं है कि पक्षियों को मोबाइल के रेडिएशन के चलते होने वाली परेशानी से तंग आकर एक पक्षी विज्ञानी पक्षीराजन (अक्षय कुमार) मोबाइल टावर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेता है। उसके कुछ अरसे बाद चेन्नै शहर में अचानक से लोगों के मोबाइल फोन उनके हाथों से छूटकर आसमान की ओर जाने ल...

काशी का क्योटो होना

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काशी का क्योटो होना   श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर काॅरिडोर के काम के तहत अधिग्रहित भवनों के तोड़े जाने के दौरान हैरान करने वाली तस्वीरे सामने आ रही हैं। जिसमें चंद्रगुप्त काल से लगायत मंदिरों सहित हजारों साल से दुनिया के लिये गुम हो चुके प्राचीन मंदिर निकलकर सामने आ रहें हैं। दुःख और शर्म की बात यह है कि इन प्राचीन मंदिरों का गुम होना किसी मुगल या विदेशी आक्रांताओं की वजह से नहीं हुआ। ऐसा... प्राचीन काशीविश्वनाथ मंदिर परिसर के इर्दगिर्द खुद को पंडे-पुजारी-महंथ और पुरातन स्थानीय निवासी कहने वालों के द्वारा प्राचीन मंदिरों को छुपाते हुए उसके आवरण के रूप में... भवन-दूकानें-धर्मशालायें बना कर अवैध सांस्कृतिक-पौराणिक-धार्मिक-ऐतिहासिक कब्जेधारियों और अतिक्रमणकारियों के स्वार्थी नीयत के चलते हुआ है। दुनिया की सबसे प्राचीन जीवंत नगरी काशी के गर्भ में कई इतिहास दफ़्न हैं। ऐसे ही कई इतिहास विश्वनाथ कारीडोर योजना में निकलकर के अब सामने आ रहे हैं। बहुत से ऐसे ऐसे प्राचीन मंदिर इस कॉरिडोर के बनने के बाद सामने आये हैं, जिन्‍हें हजारों साल से भुलाया जा चुका है। श्...